"भगवान परशुराम की एक अनसुनी कहानी"

भगवान परशुराम?

भगवान परशुराम कुण्ड में खड़े हैं, हाथ से कुल्हाड़ी अलग होकर पापमुक्त होने का दिव्य क्षण—चारों ओर हिमालय की पर्वतमाला और पवित्र लोहित नदी का दृश्य।"


यह भारत का वह कुंड है, जहा भगवान परशुराम ने, अपनी मां की हत्या करने के बाद, अपने हाथो से चिपकी हुई कुल्हाडी से मुक्ति पाई थी, यह कहानी है महान रिषी जमदग्नि और उनकी पत्नी, पतिव्रता रेणुका की, 

कहते है रेणुका नदी से, कच्चे घडे मे हर दिन पानी लाती थी, और उनके सतित्व के बल से, वह घडा टूटता नही था, उनके पांच पुत्र थे, जिसमे सबसे छोटे थे, स्वयं भगवान विष्णु का छटा अवतार परशुराम, एक दिन रेणुका ने नदी मे, 

कुछ गंधर्वो और स्वर्ग के संगीतकारो को, जल क्रीडा करते देखा, उस अद्भुत नजारे को देखकर उनका मन, एक पल के लिए मोह मे पड गया, उसी पल उनके सतित्व का बल टूटा, और वह कच्चा घडा टूट गया, जब वह खाली हाथ आश्रम पहुंची, 

तो रिषी जमदग्नि ने, अपने योग बल से जान लिया, की रेणुका का मन भटक गया था, वह इस पर अत्यधिक क्रोधित हो गए, और उसी क्रोध के साथ, उन्होने अपने पुत्रो को आदेश दिया, की अपनी मां का वध कर दो, लेकिन चारो बडे भाईयो ने, 

इस आदेश का पालन करने से मना कर दिया, तो क्रोधित पिता ने उन्हे श्राप दे दिया, तुम इसी क्षण पत्थर बन जाओ, उसी समय अपने तप करने के बाद परशुराम लौट रहे थे, और उसी क्रोध से पिता जमदग्नि ने, उन्हे भी वही आदेश दिया, 

भगवान परशुराम ने, अपने पिता के आदेश को धर्म समझा, और भारी मन से अपनी कुल्हाड़ी उठाई, और अपनी ही मां का सिर धड़ से अलग कर दिया, उनकी आग्या से प्रसन्न होकर, जमदग्नि ने अपने पुत्र से, वरदान मांगने को कहा,

परशुराम ने बिना समय गवांए, अपनी मां को जीवित करने, साथ ही पत्थर बने अपने भाईयो को, पुनह वास्तविक रूप का वर मांग लिया, सब फिर से जीवित हो गए, मानो कुछ हुआ ही ना हो, लेकिन कहानी यही खत्म नही हुई, 

मातृ हत्या का पाप, उस कुल्हाड़ी पर, एक दाग की तरह चिपक गया, और वो उनके हाथ से अलग ही नही हो रही थी, उस पाप से मुक्ति पाने के लिए, वह दर दर भटकते रहे, लेकिन कोई भी तीर्थ उस कुल्हाड़ी को छुडा नही सका, 

और अंत मे परशुराम पहुंचे, पूर्वी हिमालय की लोहित नदी के किनारे, और जैसे ही इस कुंड के जल को छुआ, तो चमत्कार हुआ, कुल्हाड़ी अपने आप उनके हाथ से छूट गई, यही पवित्र स्थान आज अरूणांचल प्रदेश मे, परशुराम कुण्ड के नाम से जाना जाता है,

आज भी हर साल मकर संक्रांति के दिन, हजारो भक्त डुबकी लगाने आते है, क्योंकि यह कुंड उनके सारे पापो को धो डालता है, ठीक वैसे ही, जैसे इसने भगवान परशुराम को पाप से मुक्त किया, भगवान परशुराम को दिल से मानने वाले सभी भक्त, कमेंट मे जय परशुराम जरूर लिखे, धन्यवाद, 


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